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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026
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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026

22 Jun 2026 3 weeks ago Vishal Singh

भारत का वैश्विक आरोग्य आंदोलन

भारत और योग का नाता सहस्राब्दियों पुराना है। भारत की प्राचीन परंपराओं पर आधारित योग एक आध्यात्मिक और दार्शनिक परिपाटी से आगे बढ़ते हुए शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक आरोग्य के वैश्विक आंदोलन में तब्दील हो गया है।

संयुक्तराष्ट्र ने इसके सार्वभौमिक आकर्षण और लाभों को मान्यता देते हुए 2014 में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया। इस संबंध में प्रस्ताव प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्तराष्ट्र से 69वें अधिवेशन में पेश किया। इस प्रस्ताव का 175 सदस्य देशों ने समर्थन किया। पहला आईडीवाई 21 जून 2015 को मनाया गया। यूनेस्को ने 2016 में योग को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासतों की अपनी प्रतिनिधि सूची में शामिल किया।

यह युगांतरकारी मान्यता वैश्विक आरोग्य में भारत के योगदान को रेखांकित करती है। यह योग की यात्रा को एक नई ऊंचाई पर ले जाकर इसे सभी महाद्वीपों तक फैले वैश्विक समारोह में तब्दील करती है। तब से आईडीवाई के आयोजन ने राष्ट्रों के बीच स्वास्थ्य, सौहार्द और संवहनीय जीवन शैली को बढ़ावा देने वाले सेतु के रूप में योग की भूमिका को मजबूत किया है।

सभ्यता की विरासतः योग का इतिहास

योग विश्व की सबसे पुरानी ज्ञान परंपराओं में से एक है। इसकी जड़ें सिंधु सरस्वती सभ्यता (ईसा पूर्व 2700) तक मिलती हैं। संस्कृत से उपजे ‘योग’ शब्द का अर्थ जोड़ना या एकताबद्ध करना है। इस तरह, यह शरीर और मन के मिलन का प्रतीक है।

योग अभ्यासों का जिक्र वेदों, उपनिषदों तथा बौद्ध और जैन परंपराओं के अलावा महाभारत और रामायण में भी मिलता है।

योग परंपरा को महर्षि पतंजलि ने योग सूत्रों के माध्यम से व्यवस्थित किया। इस तरह, उन्होंने योग की दार्शनिक और व्यावहारिक संरचना की नींव रखी। ऋषियों और योग गुरुओं ने सदियों से इस ज्ञान को संरक्षित और समृद्ध कर विश्व में इसके प्रसार में सहायता की है।

 

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को देश भर में हजारों आयोजनों के जरिए मनाया जाता है। लेकिन इसका मुख्य आयोजन हर साल एक अलग शहर में किया जाता है। मुख्य आयोजन की शुरुआत 2015 में नई दिल्ली के राजपथ से हुई थी। इसके बाद इसे चंडीगढ़, लखनऊ, देहरादून, रांची, मैसूरू, जबलपुर, श्रीनगर और विशाखापत्तनम में आयोजित किया जा चुका है।

11 आयोजनों के दौरान, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस एक वैश्विक आयोजन से बदलकर निवारक स्वास्थ्य देखभाल, स्वस्थ जीवन और आंतरिक संतुलन के लिए एक जन-आंदोलन बन चुका है। आज, इसे 190 से अधिक देशों में मनाया जाता है।

 

सामान्य योग अभ्यास क्रम (सीवाईपी): अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का आधार

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को पूरी दुनिया में एक साथ और एक समान तरीके से मनाए जाने के लिए, एक ऐसे प्रारूप की ज़रूरत थी जो सबके लिए एक जैसा और आसानी से उपलब्ध हो। इसी वजह से , 2015 में आयुष मंत्रालय ने भारत के कुछ प्रसिद्ध योग गुरुओं और संस्थानों के साथ विचार-विमर्श करके  सामान्य योग अभ्यास क्रम (कॉमन योग प्रोटोकॉल) तैयार किया।

कॉमन योग प्रोटोकॉल (सीवाईपी) एक प्रमाणित 45 मिनट का योग अभ्यास है, जो दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के आयोजनों के मुख्य कार्यक्रम के रूप में काम करता है। यह विभिन्न देशों और संस्कृतियों के लोगों को एक साझा योग अनुभव में भाग लेने का अवसर देता है। इस प्रोटोकॉल में शरीर को ढीला करने वाले अभ्यास, योगासन, कपालभाति, प्राणायाम, ध्यान और आराम देने वाली तकनीकें शामिल हैं। इसे एक आसान और व्यवस्थित रूटीन के तौर पर तैयार किया गया है, जिसे अलग-अलग उम्र और पृष्ठभूमि के लोग कर सकते हैं।

2026 के आयोजन में संस्थानों को यह छूट भी दी गई है कि वे जहाँ उचित समझें, वहाँ प्राणायाम, योग निद्रा, ध्यान और सत्संग जैसी योगिक क्रियाओं के लिए अतिरिक्त 15 मिनट शामिल कर सकते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026: इस वर्ष क्या हो रहा है

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का 12वां आयोजन 21 जून 2026 को मनाया जा रहा है और इस बार मुख्य राष्ट्रीय कार्यक्रम की मेजबानी कोलकाता कर रहा है। इस वर्ष की थीम, 'स्वस्थ आयु के लिए योग' है जो विश्व भर में जीवन भर स्वस्थ और सक्रिय जीवन जीने पर ध्यान देने पर जोर देती है। जैसे-जैसे दुनिया भर में बुजुर्गों की आबादी बढ़ रही है और गैर-संचारी रोग व जीवनशैली से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं, ध्यान केवल जीवन के साल बढ़ाने से हटकर स्वस्थ रहने की अवधि, जीवन की गुणवत्ता और समग्र कल्याण  को बेहतर बनाने पर केंद्रित हो रहा है।

योग के माध्यम से स्वस्थ आयु की आधारशिला

स्वस्थ आयु का मतलब अब यह माना जाता है कि जीवन भर काम करने की क्षमता, चलने-फिरने की शक्ति, दिमागी सेहत और सामाजिक मेलजोल बनाए रखा जाए। इस ढांचे के भीतर, योग एक बहुआयामी अभ्यास के रूप में सामने आता है जो शारीरिक गतिविधि, श्वास नियंत्रण और सचेतनता को एक साथ जोड़ता है। ताड़ासन और त्रिकोणासन जैसे अभ्यास शरीर के पोस्चर और लचीलेपन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं, जिससे लंबे समय तक बैठने के दुष्प्रभावों को दूर किया जा सकता है। भुजंगासन और मकरासन रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य और विश्राम को बढ़ावा देते हैं; जबकि अनुलोम-विलोम और भ्रामरी प्राणायाम जैसे श्वसन अभ्यास श्वास के प्रति जागरूकता और मानसिक शांति को बढ़ाते हैं। ध्यान, एकाग्रता और मानसिक स्थिति को और अधिक मजबूत करने में मदद करता है। इस प्रकार, ये सभी अभ्यास मिलकर स्वस्थ आयु के कई ज़रूरी पहलुओं में मदद करते हैं।

21 जून 2026 की तैयारी

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 की तैयारियाँ देशव्यापी कार्यक्रमों की एक श्रृंखला के माध्यम से काफी समय पहले ही शुरू हो गई थीं। इस वर्ष के आयोजनों की औपचारिक शुरुआत करते हुए, 13 मार्च 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन से 100-दिवसीय काउंटडाउन का शुभारंभ किया गया। इसके बाद महाराष्ट्र के लोनार में 75-दिवसीय काउंटडाउन कार्यक्रम और हैदराबाद के कान्हा शांति वनम में 50-दिवसीय काउंटडाउन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इनमें से प्रत्येक कार्यक्रम ने 'कॉमन योग प्रोटोकॉल' के लिए हजारों प्रतिभागियों को एक साथ लाकर सामूहिक भागीदारी के संदेश को मजबूत किया। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 की तैयारियों के दौरान एक बहुत बड़ी उपलब्धि भी हासिल की गई। 14 जून को आयोजित एक विशेष देशव्यापी लाइव योग सत्र में चार लाख से अधिक लोगों ने एक साथ जुड़कर भाग लिया, जिससे एक नया गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड बना।

इन आयोजनों को भारत की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत से भी जोड़ा गया है। खजुराहो के स्मारकों के समूह में हुए 25-दिन के काउंटडाउन कार्यक्रम में योग को प्रतिष्ठित विरासत स्थलों के साथ जोड़ा गया। इन कार्यक्रमों के साथ-साथ सरकार ने '100 दिन, 100 शहर, 100 संगठन' अभियान भी शुरू किया। इसने देश भर के संस्थानों और समुदायों को योग को रोज़मर्रा की ज़िंदगी का नियमित हिस्सा बनाने के लिए प्रोत्साहित किया है।

ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचने के लिए नई पहलकदमियां

योग 365: एक दिन से रोजमर्रा की सेहत तक

आईडीवाई  2026 में इसे सिर्फ़ एक दिन मनाने के बजाय, इसे लगातार जारी रखने पर ज़ोर दिया गया है। 'योग 365' पहल के ज़रिए, सरकार लोगों को योग को अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का नियमित हिस्सा बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। जन-अभियानों, डिजिटल पहुंच और संस्थागत भागीदारी के समर्थन से, इस पहल का मकसद योग को हर उम्र के लोगों तक पहुंचाना और इसे घर, स्कूल, कार्यस्थल और समुदायों में आसानी से करने लायक बनाना है। यह 'कॉमन योग प्रोटोकॉल', उपचारात्मक (थेराप्यूटिक) योग प्रोग्राम और  'वाई-ब्रेक' (कर्मचारियों का तनाव कम करने के लिए बनाया गया कार्यस्थल पर किया जाने वाला छोटा योग मॉड्यूल) जैसी मौजूदा पहलों को और बेहतर बनाता है।

आईडीवाई 2026 के लिए कई नई पहलकदमियां भी शुरू की गई हैं, ताकि योग को विभिन्न समूहों के लिए अधिक सुलभ और प्रासंगिक बनाया जा सके। इनमें से एक है 'हवाई यात्रा के लिए योग' (योग फॉर एयर ट्रैवल), जिसे मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (एमडीएनआईवाई) ने लंबी यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए खास तौर पर तैयार किया है। यह पहल दिखाती है कि योग को आधुनिक जीवनशैली और रोज़मर्रा की ज़रूरतों के हिसाब से कैसे ढाला जा सकता है।

एक और बड़ी प्रगति 'गैर-संचारी रोगों के लिए 10 योग प्रोटोकॉल' की शुरुआत है। मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान में पारंपरिक चिकित्सा के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोगी केंद्र (डब्ल्यूएचओ कोलैबोरेटिंग सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन) द्वारा विकसित ये प्रोटोकॉल मधुमेह, उच्च रक्तचाप, ब्रोन्कियल अस्थमा और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के समाधान में सहायक हैं। बच्चों, किशोरों, बुजुर्गों, महिलाओं, गर्भवती महिलाओं और नशा मुक्ति की प्रक्रिया से गुजर रहे लोगों के लिए भी खास मॉड्यूल तैयार किए गए हैं। इन प्रोटोकॉल का मकसद योग के अभ्यास को खास आबादी वाले समूहों और स्वास्थ्य के लिए अधिक सटीक और सुलभ बनाना है।

‘माईगव’ प्लेटफॉर्म पर क्विज़, फोटोग्राफी प्रतियोगिताओं, पोस्टर बनाने की प्रतियोगिताओं और शॉर्ट-वीडियो बनाने की प्रतियोगिता जैसी गतिविधियों की एक श्रृंखला के माध्यम से नागरिकों की भागीदारी को भी बढ़ाया गया है। ये पहल 21 जून को मनाए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस में ज़्यादा से ज़्यादा लोगों की भागीदारी को बढ़ावा दे रही हैं।

एक 'संपूर्ण-सामाजिक' आंदोलन

आईडीवाई  2026 की तैयारियों में सरकार और समाज, दोनों को साथ लेकर चलने का व्यापक नज़रिया दिखता है। मंत्रालयों, राज्य सरकारों, शिक्षण संस्थानों, कॉर्पोरेट संगठनों, नागरिक समाज समूहों और स्थानीय निकायों को इन आयोजनों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसका मकसद यह पक्का करना है कि योग समाज के हर वर्ग तक पहुँचे, जिसमें दूर-दराज़ और सुविधाओं से वंचित समुदाय भी शामिल हैं।

इस पहल में डिजिटल प्लेटफॉर्म अहम भूमिका निभा रहे हैं। देश भर के संगठनों और समुदायों के लिए पंजीकरण, कार्यक्रम समन्वय और भागीदारी को आसान बनाने के लिए 'योग संगम पोर्टल' शुरू किया गया है। वहीं, 'योग पार्क पोर्टल' योग के लिए समर्पित स्थानों को विकसित करने और उनकी मैपिंग करने में मदद करता है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के बाद भी नियमित अभ्यास को बढ़ावा मिले। ये दोनों प्लेटफॉर्म मिलकर जन-भागीदारी को मजबूत करने और साल भर लोगों के लिए योग को अधिक सुलभ बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

पिछले आयोजन: स्तर और नवाचार का एक दशक

वैश्विक पहचान से लेकर जन-भागीदारी तक

महामारी के दौरान योग: चुनौतीपूर्ण समय में आरोग्य

कोविड-19 महामारी ने अलगाव (आइसोलेशन) के दौर में भी एकजुट रहने की जन-आंदोलनों की क्षमता की कड़ी परीक्षा ली। सार्वजनिक समारोहों पर प्रतिबंधों के बावजूद निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस ने डिजिटल भागीदारी, वर्चुअल आयोजनों और घर पर योग के अभ्यास के ज़रिए जारी रखा गया। "घर पर योग, परिवार के साथ योग" (2020) और "आरोग्य के लिए योग" (2021) जैसे विषयों ने उस समय की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए, वैश्विक स्वास्थ्य संकट के दौरान शारीरिक फिटनेस, मानसिक तंदुरुस्ती और भावनात्मक मज़बूती बनाए रखने में योग की भूमिका को उजागर किया। इस दौर ने बदलते हालात में योग की अनुकूलन क्षमता और उसकी हमेशा बनी रहने वाली अहमियत को साबित किया।

पहला अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2015 को मनाया गया था, जिसने भारत के नेतृत्व में एक नए वैश्विक आरोग्य आंदोलन की शुरुआत की। नई दिल्ली के राजपथ पर आयोजित मुख्य कार्यक्रम में 84 देशों के प्रतिनिधियों सहित 35,985 लोगों ने एक साथ 'कॉमन योग प्रोटोकॉल' का सामूहिक प्रदर्शन किया था।

उद्घाटन समारोह ने दो मामलों में गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में जगह बनाई। इसमें एक ही जगह पर सबसे बड़ी योग क्लास और योग क्लास में सबसे ज़्यादा देशों के लोगों के शामिल होने का रिकॉर्ड बना।

ये आयोजन केवल नई दिल्ली तक ही सीमित नहीं रहे। पूरे भारत और दुनिया भर के देशों में योग सत्र आयोजित किए गए। इससे 'अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस' की घोषणा के साथ मिले अभूतपूर्व अंतर्राष्ट्रीय समर्थन का पता चलता है। पहले आयोजन ने भविष्य के आयोजनों के लिए एक खाका तैयार किया — जिसमें बड़े पैमाने पर लोगों की भागीदारी, वैश्विक स्तर पर पहुँच और स्वास्थ्य व आरोग्य के प्रति साझा प्रतिबद्धता शामिल थी।

पूरे भारत में विस्तार

जैसे-जैसे यह आयोजन आगे बढ़ा, राष्ट्रीय स्तर के समारोह देश भर में आयोजित किए गए। चंडीगढ़, लखनऊ, देहरादून, रांची, मैसूरु, जबलपुर, श्रीनगर और विशाखापत्तनम जैसे मेज़बान शहरों ने योग को अलग-अलग समुदायों और क्षेत्रों के लोगों के करीब पहुँचाया। हर आयोजन में स्थानीय सांस्कृतिक परिवेश की झलक दिखी और साथ ही योग की सर्वव्यापी लोकप्रियता को भी और मज़बूती मिली।

इस भौगोलिक विस्तार ने लोगों की भागीदारी को भी मज़बूत किया। स्कूल, विश्वविद्यालय, सशस्त्र बल, स्वास्थ्य सेवा संस्थान, कार्यस्थल, स्थानीय निकाय और सामुदायिक संगठन तेज़ी से इन समारोहों का हिस्सा बनने लगे। योग को अब केवल एक पारंपरिक अभ्यास के तौर पर नहीं देखा जाता था; इसे एक साझा जन-आंदोलन के रूप में अपनाया जा रहा है।

एक दशक का अहम पड़ाव: अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2025

2025 में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का 11वां संस्करण दुनिया भर में इसके आयोजन का एक दशक पूरा होने का प्रतीक बना। "एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के लिए योग" की थीम पर मनाए गए इस संस्करण में मानव, समाज और इस ग्रह के आपसी जुड़ाव को रेखांकित किया। इस अहम पड़ाव को यादगार बनाने के लिए सरकार ने दस विशेष कार्यक्रम शुरू किए, जिनमें संवहनीयता, समावेशन, युवाओं की भागीदारी, स्वास्थ्य सेवा एकीकरण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे विषय शामिल थे। इन कार्यक्रमों ने इस आयोजन को और अधिक गहरा और व्यापक बनाया।

इस आंदोलन में लोगों की बड़ी संख्या में भागीदारी ने इसकी परिपक्वता को दिखाया। देश भर में 13 लाख से ज़्यादा योग कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें 26 करोड़ से ज़्यादा लोगों ने हिस्सा लिया। विशाखापत्तनम में हुए मुख्य कार्यक्रम में 3 लाख से ज़्यादा लोग शामिल हुए और दो गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए — पहला, सबसे बड़ी योग क्लास के लिए और दूसरा, एक साथ सबसे बड़े सूर्य नमस्कार प्रदर्शन के लिए। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2025 के इस संस्करण ने यह साबित कर दिया कि कैसे यह दिन एक वार्षिक आयोजन से बदलकर स्वास्थ्य और आरोग्य के लिए एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन बन चुका है।

दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस

पिछले दशक में, 'अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस' सचमुच एक वैश्विक आयोजन बन गया है, जो स्वास्थ्य और खुशहाली के साझा उत्सव के ज़रिए दुनिया भर के लोगों को एक साथ लाता है। हर साल, दुनिया भर में मशहूर जगहों, सार्वजनिक स्थानों, शिक्षण संस्थानों और सांस्कृतिक धरोहरों पर योग सत्र आयोजित किए जाते हैं।

साल 2024 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में जश्न मनाया गया, जिससे दुनिया भर में योग की लगातार लोकप्रियता को पुख्ता किया। जापान में, बारिश के बावजूद योग प्रेमियों ने ऐतिहासिक त्सुकिजी होंगवानजी मंदिर में हुए कार्यक्रम में हिस्सा लिया। दक्षिण अफ्रीका में, जोहान्सबर्ग के वांडरर्स क्रिकेट स्टेडियम में लगभग 8,000 लोग एक साथ आए। ब्राज़ील में इताइपु बिनासिओनल सेंट्रल व्यूपॉइंट पर कार्यक्रम आयोजित किए गए, जबकि सऊदी अरब में रियाद के प्रिंस फैसल बिन फहद ओलंपिक कॉम्प्लेक्स में एक 'कॉमन योग प्रोटोकॉल' सत्र हुआ, जिसका नेतृत्व एक सऊदी महिला प्रशिक्षक ने किया। ओमान, मिस्र, बांग्लादेश, भूटान, श्रीलंका, अर्जेंटीना और क्रोएशिया जैसे देशों में भी योग दिवस मनाया गया।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2025 के इस दशकीय समारोह के दौरान इसका वैश्विक दायरा और अधिक विस्तृत हो गया। विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय दूतावासों और सांस्कृतिक केंद्रों ने कार्यक्रमों का आयोजन किया, वहीं अंतर्राष्ट्रीय सहयोग इस वर्ष की गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।

इस वर्ष, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के समन्वय से, विदेशों में स्थित 210 से अधिक भारतीय दूतावास  दुनिया भर के लगभग 2,500 स्थानों पर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रमों का आयोजन कर रहे हैं।

'कॉमन योग प्रोटोकॉल' ने इस साझा अनुभव को बनाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संयुक्त राष्ट्र की छह आधिकारिक भाषाओं — अरबी, चीनी, अंग्रेजी, फ़्रांसिसी, रूसी और स्पेनिश में उपलब्ध यह प्रोटोकॉल अलग-अलग देशों के लोगों को योग के एक जैसे अभ्यास और आसन करने में मदद करता है।

एक दिन से 365 दिन तक: योग को रोज़मर्रा की ज़िंदगी में अपनाना

जैसे-जैसे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस अपने 12वें संस्करण में प्रवेश कर रहा है, इसका ध्यान धीरे-धीरे केवल उत्सव मनाने से हटकर इसे लगातार जारी रखने की ओर बढ़ रहा है। इस आंदोलन की सफलता अब केवल 21 जून को इसमें शामिल होने वाले लोगों की संख्या से नहीं मापी जाती, बल्कि इस बात से मापी जाती है कि यह साल भर नियमित अभ्यास के लिए लोगों को कितना प्रोत्साहित करता है।

यह बदलाव 'योग 365' जैसी पहलों, 'कॉमन योग प्रोटोकॉल' के विस्तार, समुदाय-आधारित कार्यक्रमों और स्कूलों, कार्यस्थलों व सार्वजनिक संस्थानों में योग को शामिल किए जाने जैसे प्रयासों में दिखता है। 'स्वस्थ आयु के लिए योग' का विषय इस संदेश को और मज़बूत करता है।

आईडीवाई 2026 का व्यापक संदेश स्पष्ट है: योग केवल एक मैट, किसी स्थान या कैलेंडर के किसी एक दिन तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। चाहे घर पर कुछ मिनटों के लिए अभ्यास किया जाए, या किसी सामुदायिक पार्क में, कार्यस्थल पर या फिर किसी क्लासरूम में, इसके लाभ इसे निरंतर करने से ही मिलते हैं। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की वास्तविक विरासत को केवल 21 जून की भागीदारी से नहीं, बल्कि इस बात से मापा जाएगा कि लोग आने वाले दिनों, महीनों और वर्षों में  इसे अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कितना अपनाते हैं।

“We urge all parties to commit to genuine peace talks and halt all military operations that endanger civilian lives.”
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